रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कार्तिक स्वामी मंदिर में गढ़वाली लोकगीत “कंचनी कैलाश भूली” की शूटिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में बिना अनुमति किए गए फिल्मांकन और नृत्य प्रस्तुति पर आपत्ति जताई है। समिति का कहना है कि शूटिंग के लिए किसी प्रकार की लिखित या मौखिक अनुमति नहीं ली गई थी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, प्रसिद्ध लोकगायिका हेमा नेगी करासी के गढ़वाली लोकगीत “कंचनी कैलाश भूली” का वीडियो हाल ही में कार्तिक स्वामी मंदिर परिसर में शूट किया गया था। यह गीत 31 मई को रिलीज हुआ। वीडियो में मंदिर परिसर के भीतर फिल्मांकन और नृत्य दृश्य दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि धार्मिक स्थल की गरिमा और मर्यादा का ध्यान रखे बिना शूटिंग की गई, जिससे आस्था से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
मंदिर समिति ने जताई नाराजगी
कार्तिक स्वामी मंदिर समिति के अध्यक्ष विक्रम नेगी ने कहा कि कार्तिक स्वामी मंदिर 365 गांवों की आस्था का प्रमुख केंद्र है और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि:
- शूटिंग के लिए मंदिर समिति से कोई अनुमति नहीं ली गई।
- समिति को इस पूरे मामले की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली।
- बिना अनुमति धार्मिक स्थल पर फिल्मांकन को गंभीरता से लिया जा रहा है।
- मामले की जांच कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई पर भी विचार
मंदिर प्रबंधक पूर्ण नेगी ने कहा कि कार्तिक स्वामी मंदिर धार्मिक आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, न कि मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का स्थल। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति मंदिर परिसर में शूटिंग किए जाने के मामले में कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
इस घटना को लेकर क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। स्थानीय निवासी प्रीतम नेगी, प्रदीप पुरोहित, कपिल बर्त्वाल और हरीश देवली सहित कई लोगों ने मंदिर परिसर में हुई शूटिंग पर आपत्ति दर्ज कराई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
लोकगीत के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ बता रहे हैं।
365 गांवों की आस्था का केंद्र है कार्तिक स्वामी मंदिर
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर भगवान कार्तिकेय को समर्पित उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर 365 गांवों के आराध्य देव के रूप में माना जाता है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थल अपने प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालयी दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है।
निष्कर्ष
कार्तिक स्वामी मंदिर में गढ़वाली लोकगीत “कंचनी कैलाश भूली” की शूटिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक प्रस्तुति के बीच संतुलन का मुद्दा बन गया है। मंदिर समिति ने बिना अनुमति फिल्मांकन को गंभीर बताते हुए जांच और संभावित कार्रवाई की बात कही है। वहीं स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर विरोध और बहस लगातार जारी है।
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