थराली CHC के पास मिली जली हुई सरकारी दवाइयों की राखथराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास जली हुई दवाइयों के अवशेष मिलने के बाद जांच की मांग उठी।

थराली/चमोली। थराली CHC जली दवाइयां- चमोली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) थराली के समीप जली हुई दवाइयों की राख और अवशेष मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल के पास बड़ी मात्रा में जली हुई दवाइयों के अवशेष पाए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि ये दवाइयां सरकारी स्टॉक का हिस्सा हो सकती हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दवाइयों को किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में नष्ट किया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ये दवाइयां सरकारी स्टॉक की हैं, तो क्या उनकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी या फिर उपयोग योग्य दवाइयों को नियमों के विपरीत तरीके से नष्ट किया गया। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।


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गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारें सरकारी अस्पतालों में मरीजों तथा प्रसूताओं को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराने का दावा करती हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर के पास जली हुई दवाइयों का मिलना दवा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों द्वारा आपातकालीन मरीजों को देखने के आरोप सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह नया मामला स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है।


Q. थराली CHC के पास क्या मिला है?

A. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) थराली के पास जली हुई दवाइयों की राख और दवा पैकेजिंग का बड़ा ढेर मिलने की सूचना सामने आई है।

Q. मामले में स्वास्थ्य विभाग पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

A. यदि जली हुई दवाइयां सरकारी स्टॉक की हैं तो उनके निस्तारण की प्रक्रिया, अनुमति और कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Q. क्या दवाइयों की एक्सपायरी हो चुकी थी?

A. फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दवाइयां एक्सपायर थीं या उपयोग योग्य।

Q. स्थानीय लोगों की क्या मांग है?

A. स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

Q. यह मामला क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

A. सरकार अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराने का दावा करती है। ऐसे में सरकारी दवाइयों के कथित निस्तारण का मामला दवा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग

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